रम्भा अप्सरा साधना
Don't forget to subscribe! Youtube Post
Call +919560160184
इस अप्सरा का नाम आपने अनेक शास्त्रों में पढ़ा होगा, अतः यहाँ इनका विस्तृत विवेचन नहीं करेंगे। रम्भा की साधना शारदीय नवरात्रि में आरम्भ करने से विशेष फलदायी होती है। यदि इस साधना से पूर्व गुरुमन्त्र प्राप्त न हो, तो कामबीज मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। इनकी सिद्धि हेतु दृढ़प्रतिज्ञ होना आवश्यक है, क्योंकि इनकी सिद्धि में कई बार ११ से ३१ दिन या अधिक भी लग सकते हैं, अतः पूर्ण ऊर्जा से धैर्यपूर्वक साधना करें। चूंकि ये किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाती, इसलिए इनकी साधना सुरक्षित है, किन्तु किसी भी तरह से छल करने की मंशा हृदय में न रखें। यदि किसी कारण यह साधना मध्य में छोड़नी पड़े तो विधि पूर्वक विशेष याचना करके ही ऐसा करें, नहीं तो बाद में मानसिक दुविधा उत्पन्न हो सकती है। रम्भा के प्रसन्न होने पर आप उन्हें सात्विक मिष्ठान भोग अवश्य प्रदान करें।
मंत्र इस प्रकार है-
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe! Youtube Post Call 919560160184
ॐ रं क्षं रम्भे आगच्छ आगच्छ क्षं रं ॐ स्वाहा ।।
इस मंत्र का प्रतिदिन विधि पूर्वक स्वच्छ पीत आसन पर विराजमान
होकर साफ वस्त्रों को धारण करके निरन्तर १०१ माला जप करें। अप्सरा के प्रसन्न होने पर तीन वचन ले लें- स्वयं की सुरक्षा,
विघ्न के समय प्रकट होना तथा साधना की दृढ़ता का वरदान।
यदि स्त्रियाँ इनकी साधना करें, तो यह रंग, रूप और यौवन का वरदान सहर्ष दे देती है। इस साधना से प्रेम व समर्पण का गुण स्वतः आ जाता है।इस यन्त्र को साधना के समय प्रत्यक्ष स्थापित रखें। हाथ में गुलाब की पंखुड़ियों से रम्भा का इस मंत्र से आवाहन करें- ॐ रम्भये आगच्छ पूर्ण यौवन संस्तुतये ॥
यह आवाहन कम से कम १०८ बार करें। स्वयं पर इत्र छिड़कते रहें। सुगन्धित अगरबत्ती साधना के समय जलाकर रखें। धन प्राप्ति हेतु रम्भा के इस मन्त्र का जाप करें-
ॐ धनदाये धनदा रम्भायै नमः ।॥
रम्भा की प्रसन्नता और वरदान प्राप्ति हेतु ५१ माला इस मंत्र का
जप करें-
ॐ ह्रीं रं रम्भे आगच्छ आज्ञां पालय मनोवांछितं देहि एं ॐ स्वाहा ॥
अप्सरा के प्रत्यक्ष होने पर संयम रखते हुए पूर्णतया समर्पित भाव रखें। यह सिद्धि होने पर साधक रोग मुक्त रहता है, कभी वृद्ध नहीं होता। जीवन प्रसन्नता पूर्वक बीतता है।

